गीता 16.19
कुंडलीपंचांग

भगवद्गीता · अध्याय 16 · श्लोक 19

गीता 16.19

अध्याय 16 – दैवासुरसम्पद्विभागयोग · श्रीकृष्ण कहते हैं

गीता 16.19 श्रीकृष्ण

तानहं द्विषतः क्रूरान्संसारेषु नराधमान्।
क्षिपाम्यजस्रमशुभानासुरीष्वेव योनिषु ॥

हिंदी अर्थउन द्वेष करनेवाले, क्रूर स्वभाववाले और संसारमें महान् नीच, अपवित्र मनुष्योंको मैं बार-बार आसुरी योनियोंमें गिराता ही रहता हूँ।

रोमन में पढ़ें

tān ahaṁ dviṣhataḥ krūrān sansāreṣhu narādhamān
kṣhipāmy ajasram aśhubhān āsurīṣhv eva yoniṣhu

यह श्लोक इन विषयों में

हिंदी अर्थ स्वामी रामसुखदास जी के अनुवाद पर आधारित है। शीर्षक, सरल भावार्थ, मुख्य शब्द और "आज के जीवन में" SachiBhakti की ओर से।