गीता 12.7 श्रीकृष्ण तेषामहं समुद्धर्ता मृत्युसंसारसागरात्। भवामि नचिरात्पार्थ मय्यावेशितचेतसाम् ॥ हिंदी अर्थहे पार्थ ! मेरेमें आविष्ट चित्तवाले उन भक्तोंका मैं मृत्युरूप संसार-समुद्रसे शीघ्र ही उद्धार करनेवाला बन जाता हूँ। रोमन में पढ़ें teṣhām ahaṁ samuddhartā mṛityu-saṁsāra-sāgarāt bhavāmi na chirāt pārtha mayy āveśhita-chetasām