गीता 12.6 श्रीकृष्ण ये तु सर्वाणि कर्माणि मयि संन्यस्य मत्पराः। अनन्येनैव योगेन मां ध्यायन्त उपासते ॥ हिंदी अर्थपरन्तु जो कर्मोंको मेरे अर्पण करके और मेरे परायण होकर अनन्ययोगसे मेरा ही ध्यान करते हुए मेरी उपासना करते हैं। रोमन में पढ़ें ye tu sarvāṇi karmāṇi mayi sannyasya mat-paraḥ ananyenaiva yogena māṁ dhyāyanta upāsate