गीता 12.11
कुंडलीपंचांग

भगवद्गीता · अध्याय 12 · श्लोक 11

गीता 12.11

अध्याय 12 – भक्तियोग · श्रीकृष्ण कहते हैं

गीता 12.11 श्रीकृष्ण

अथैतदप्यशक्तोऽसि कर्तुं मद्योगमाश्रितः।
सर्वकर्मफलत्यागं ततः कुरु यतात्मवान् ॥

हिंदी अर्थअगर मेरे योग-(समता-) के आश्रित हुआ तू इस(पूर्वश्लोकमें कहे गये साधन-) को भी करनेमें असमर्थ है, तो मन-इन्द्रियोंको वशमें करके सम्पूर्ण कर्मोंके फलका त्याग कर।

रोमन में पढ़ें

athaitad apy aśhakto ’si kartuṁ mad-yogam āśhritaḥ
sarva-karma-phala-tyāgaṁ tataḥ kuru yatātmavān

यह श्लोक इन विषयों में

हिंदी अर्थ स्वामी रामसुखदास जी के अनुवाद पर आधारित है। शीर्षक, सरल भावार्थ, मुख्य शब्द और "आज के जीवन में" SachiBhakti की ओर से।