गीता 10.3
कुंडलीपंचांग

भगवद्गीता · अध्याय 10 · श्लोक 3

गीता 10.3

अध्याय 10 – विभूतियोग · श्रीकृष्ण कहते हैं

गीता 10.3 श्रीकृष्ण

यो मामजमनादिं च वेत्ति लोकमहेश्वरम्।
असम्मूढः स मर्त्येषु सर्वपापैः प्रमुच्यते ॥

हिंदी अर्थजो मनुष्य मुझे अजन्मा, अनादि और सम्पूर्ण लोकोंका महान् ईश्वर जानता है अर्थात् दृढ़तासे मानता है, वह मनुष्योंमें असम्मूढ़ (जानकार) है और वह सम्पूर्ण पापोंसे मुक्त हो जाता है।

रोमन में पढ़ें

yo māmajam anādiṁ cha vetti loka-maheśhvaram
asammūḍhaḥ sa martyeṣhu sarva-pāpaiḥ pramuchyate

यह श्लोक इन विषयों में

हिंदी अर्थ स्वामी रामसुखदास जी के अनुवाद पर आधारित है। शीर्षक, सरल भावार्थ, मुख्य शब्द और "आज के जीवन में" SachiBhakti की ओर से।