विश्वकर्मा आरती

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आरती · 10 बार पढ़ा गया
रोहन

आरती विश्वकर्मा की, जो जग में सदा प्यारी। सृष्टि के रचयिता, देवों के देव हमारे।

दीप जलाए जग में, अंधकार मिटाए। ज्ञान का प्रकाश फैलाए, सब दुख हराए।

शिल्पी जग के स्वामी, कला के अधिपति। विश्वकर्मा की आरती, करें हम सब भक्ति।

हाथों में है कमल सा, मुख पर है तेज भारी। सर्वशक्तिमान देवता, विश्वकर्मा हमारी।