गीता 9.32
कुंडलीपंचांग

भगवद्गीता · अध्याय 9 · श्लोक 32

गीता 9.32

अध्याय 9 – राजविद्याराजगुह्ययोग · श्रीकृष्ण कहते हैं

गीता 9.32 श्रीकृष्ण

मां हि पार्थ व्यपाश्रित्य येऽपि स्युः पापयोनयः।
स्त्रियो वैश्यास्तथा शूद्रास्तेऽपि यान्ति परां गतिम् ॥

हिंदी अर्थहे पृथानन्दन ! जो भी पापयोनिवाले हों तथा जो भी स्त्रियाँ, वैश्य और शूद्र हों, वे भी सर्वथा मेरे शरण होकर निःसन्देह परमगतिको प्राप्त हो जाते हैं।

रोमन में पढ़ें

māṁ hi pārtha vyapāśhritya ye ’pi syuḥ pāpa-yonayaḥ
striyo vaiśhyās tathā śhūdrās te ’pi yānti parāṁ gatim

यह श्लोक इन विषयों में

हिंदी अर्थ स्वामी रामसुखदास जी के अनुवाद पर आधारित है। शीर्षक, सरल भावार्थ, मुख्य शब्द और "आज के जीवन में" SachiBhakti की ओर से।