गीता 8.15
कुंडलीपंचांग

भगवद्गीता · अध्याय 8 · श्लोक 15

गीता 8.15

अध्याय 8 – अक्षरब्रह्मयोग · श्रीकृष्ण कहते हैं

गीता 8.15 श्रीकृष्ण

मामुपेत्य पुनर्जन्म दुःखालयमशाश्वतम्।
नाप्नुवन्ति महात्मानः संसिद्धिं परमां गताः ॥

हिंदी अर्थमहात्मालोग मुझे प्राप्त करके दुःखालय और अशाश्वत पुनर्जन्मको प्राप्त नहीं होते; क्योंकि वे परमसिद्धिको प्राप्त हो गये हैं अर्थात् उनको परम प्रेमकी प्राप्ति हो गयी है।

रोमन में पढ़ें

mām upetya punar janma duḥkhālayam aśhāśhvatam
nāpnuvanti mahātmānaḥ sansiddhiṁ paramāṁ gatāḥ

यह श्लोक इन विषयों में

हिंदी अर्थ स्वामी रामसुखदास जी के अनुवाद पर आधारित है। शीर्षक, सरल भावार्थ, मुख्य शब्द और "आज के जीवन में" SachiBhakti की ओर से।