गीता 7.20
कुंडलीपंचांग

भगवद्गीता · अध्याय 7 · श्लोक 20

गीता 7.20

अध्याय 7 – ज्ञानविज्ञानयोग · श्रीकृष्ण कहते हैं

गीता 7.20 श्रीकृष्ण

कामैस्तैस्तैर्हृतज्ञानाः प्रपद्यन्तेऽन्यदेवताः।
तं तं नियममास्थाय प्रकृत्या नियताः स्वया ॥

हिंदी अर्थउन-उन कामनाओंसे जिनका ज्ञान अपहृत हो गया है, ऐसे वे मनुष्य अपनी-अपनी प्रकृतिसे नियन्त्रित होकर (देवताओंके) उन-उन नियमोंको धारण करते हुए उन-उन देवताओंके शरण हो जाते हैं।

रोमन में पढ़ें

kāmais tais tair hṛita-jñānāḥ prapadyante ’nya-devatāḥ
taṁ taṁ niyamam āsthāya prakṛityā niyatāḥ svayā

हिंदी अर्थ स्वामी रामसुखदास जी के अनुवाद पर आधारित है। शीर्षक, सरल भावार्थ, मुख्य शब्द और "आज के जीवन में" SachiBhakti की ओर से।