गीता 4.8
कुंडलीपंचांग

भगवद्गीता · अध्याय 4 · श्लोक 8

गीता 4.8

अध्याय 4 – ज्ञानकर्मसंन्यासयोग · श्रीकृष्ण कहते हैं

गीता 4.8 श्रीकृष्ण

परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।
धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे ॥

हिंदी अर्थसाधुओं-(भक्तों-) की रक्षा करनेके लिये, पापकर्म करनेवालोंका विनाश करनेके लिये और धर्मकी भलीभाँति स्थापना करनेके लिये मैं युग-युगमें प्रकट हुआ करता हूँ।

रोमन में पढ़ें

paritrāṇāya sādhūnāṁ vināśhāya cha duṣhkṛitām
dharma-sansthāpanārthāya sambhavāmi yuge yuge

हिंदी अर्थ स्वामी रामसुखदास जी के अनुवाद पर आधारित है। शीर्षक, सरल भावार्थ, मुख्य शब्द और "आज के जीवन में" SachiBhakti की ओर से।