गीता 18.55
कुंडलीपंचांग

भगवद्गीता · अध्याय 18 · श्लोक 55

गीता 18.55

अध्याय 18 – मोक्षसंन्यासयोग · श्रीकृष्ण कहते हैं

गीता 18.55 श्रीकृष्ण

भक्त्या मामभिजानाति यावान्यश्चास्मि तत्त्वतः।
ततो मां तत्त्वतो ज्ञात्वा विशते तदनन्तरम् ॥

हिंदी अर्थउस पराभक्तिसे मेरेको, मैं जितना हूँ और जो हूँ -- इसको तत्त्वसे जान लेता है तथा मेरेको तत्त्वसे जानकर फिर तत्काल मेरेमें प्रविष्ट हो जाता है।

रोमन में पढ़ें

bhaktyā mām abhijānāti yāvān yaśh chāsmi tattvataḥ
tato māṁ tattvato jñātvā viśhate tad-anantaram

हिंदी अर्थ स्वामी रामसुखदास जी के अनुवाद पर आधारित है। शीर्षक, सरल भावार्थ, मुख्य शब्द और "आज के जीवन में" SachiBhakti की ओर से।