गीता 18.3 श्रीकृष्ण त्याज्यं दोषवदित्येके कर्म प्राहुर्मनीषिणः। यज्ञदानतपःकर्म न त्याज्यमिति चापरे ॥ हिंदी अर्थकई विद्वान् कहते हैं कि कर्मोंको दोषकी तरह छोड़ देना चाहिये और कई विद्वान् कहते हैं कि यज्ञ, दान और तप-रूप कर्मोंका त्याग नहीं करना चाहिये। रोमन में पढ़ें tyājyaṁ doṣha-vad ity eke karma prāhur manīṣhiṇaḥ yajña-dāna-tapaḥ-karma na tyājyam iti chāpare