गीता 15.17 श्रीकृष्ण उत्तमः पुरुषस्त्वन्यः परमात्मेत्युदाहृतः। यो लोकत्रयमाविश्य बिभर्त्यव्यय ईश्वरः ॥ हिंदी अर्थउत्तम पुरुष तो अन्य ही है, जो परमात्मा नामसे कहा गया है। वही अविनाशी ईश्वर तीनों लोकोंमें प्रविष्ट होकर सबका भरण-पोषण करता है। रोमन में पढ़ें uttamaḥ puruṣhas tv anyaḥ paramātmety udāhṛitaḥ yo loka-trayam āviśhya bibharty avyaya īśhvaraḥ