गीता 14.5
कुंडलीपंचांग

भगवद्गीता · अध्याय 14 · श्लोक 5

गीता 14.5

अध्याय 14 – गुणत्रयविभागयोग · श्रीकृष्ण कहते हैं

गीता 14.5 श्रीकृष्ण

सत्त्वं रजस्तम इति गुणाः प्रकृतिसंभवाः।
निबध्नन्ति महाबाहो देहे देहिनमव्ययम् ॥

हिंदी अर्थहे महाबाहो ! प्रकृतिसे उत्पन्न होनेवाले सत्त्व, रज और तम -- ये तीनों गुण अविनाशी देहीको देहमें बाँध देते हैं।

रोमन में पढ़ें

sattvaṁ rajas tama iti guṇāḥ prakṛiti-sambhavāḥ
nibadhnanti mahā-bāho dehe dehinam avyayam

हिंदी अर्थ स्वामी रामसुखदास जी के अनुवाद पर आधारित है। शीर्षक, सरल भावार्थ, मुख्य शब्द और "आज के जीवन में" SachiBhakti की ओर से।