गीता 14.5 श्रीकृष्ण सत्त्वं रजस्तम इति गुणाः प्रकृतिसंभवाः। निबध्नन्ति महाबाहो देहे देहिनमव्ययम् ॥ हिंदी अर्थहे महाबाहो ! प्रकृतिसे उत्पन्न होनेवाले सत्त्व, रज और तम -- ये तीनों गुण अविनाशी देहीको देहमें बाँध देते हैं। रोमन में पढ़ें sattvaṁ rajas tama iti guṇāḥ prakṛiti-sambhavāḥ nibadhnanti mahā-bāho dehe dehinam avyayam