गीता 10.28
कुंडलीपंचांग

भगवद्गीता · अध्याय 10 · श्लोक 28

गीता 10.28

अध्याय 10 – विभूतियोग · श्रीकृष्ण कहते हैं

गीता 10.28 श्रीकृष्ण

आयुधानामहं वज्रं धेनूनामस्मि कामधुक्।
प्रजनश्चास्मि कन्दर्पः सर्पाणामस्मि वासुकिः ॥

हिंदी अर्थआयुधोंमें वज्र और धेनुओंमें कामधेनु मैं हूँ। सन्तान-उत्पत्तिका हेतु कामदेव मैं हूँ और सर्पोंमें वासुकि मैं हूँ।

रोमन में पढ़ें

āyudhānām ahaṁ vajraṁ dhenūnām asmi kāmadhuk
prajanaśh chāsmi kandarpaḥ sarpāṇām asmi vāsukiḥ

हिंदी अर्थ स्वामी रामसुखदास जी के अनुवाद पर आधारित है। शीर्षक, सरल भावार्थ, मुख्य शब्द और "आज के जीवन में" SachiBhakti की ओर से।