आप चाहते हैं कि आपका बच्चा डॉक्टर या इंजीनियर बने, पर उसका मन संगीत, खेल या कला में है। आप क्या करेंगे?
आपको उसके भविष्य की चिंता है — और उसे अपने मन की।
एक विकल्प चुनें। उसके बाद गीता का दृष्टिकोण दिखेगा — आपके चुनाव को “पास” या “फ़ेल” नहीं किया जाएगा।
आपकी सोच बनाम गीता का कोण
यह तुलना है, निर्णय नहीं
आपने चुना
—
गीता का कोण
गीता स्वभाव के अनुसार अपनी राह को श्रेष्ठ मानती है (3.35, 18.47)। माता-पिता का काम कृष्ण जैसा है — पूरा समझाना, फिर भरोसे के साथ फ़ैसले में साथ देना (18.63)।
आपके चुनाव पर गीता की नज़र
A. जो हम कहेंगे, वही पढ़ेगा — चिंता सच्ची है। पर गीता कहती है कि अपना स्वभाव से मिला धर्म, दूसरे के अच्छी तरह निभाए धर्म से भी श्रेष्ठ है (3.35, 18.47)। किसी और की राह पर चलाया गया मन अक्सर उसमें खिलता नहीं।
B. जो चाहे करे, हम कुछ नहीं कहेंगे — आज़ादी देना सुंदर है, पर कृष्ण ने अर्जुन को अकेला नहीं छोड़ा — पूरी बात समझाई, फिर फ़ैसला उस पर छोड़ा (18.63)। मार्गदर्शन के बिना छोड़ देना भी साथ न देना है।
C. उसकी रुचि समझूँगा, फिर साथ मिलकर तय करेंगे — यह कृष्ण के तरीके के करीब है — पहले पूरा समझाना, फिर “विचार करके जैसा चाहो वैसा करो” (18.63)। और जो आप करेंगे, वही बच्चा सीखेगा (3.21)।
यह व्याख्या SachiBhakti की है; मूल बात नीचे दिए श्लोकों में पढ़ें।
हिंदी अर्थअच्छी तरह आचरणमें लाये हुए दूसरेके धर्मसे गुणोंकी कमीवाला अपना धर्म श्रेष्ठ है। अपने धर्ममें तो मरना भी कल्याणकारक है और दूसरेका धर्म भयको देनेवाला है।
हिंदी अर्थअच्छी तरहसे अनुष्ठान किये हुए परधर्मसे गुणरहित अपना धर्म श्रेष्ठ है। कारण कि स्वभावसे नियत किये हुए स्वधर्मरूप कर्मको करता हुआ मनुष्य पापको प्राप्त नहीं होता।
इति ते ज्ञानमाख्यातं गुह्याद्गुह्यतरं मया।
विमृश्यैतदशेषेण यथेच्छसि तथा कुरु ॥
हिंदी अर्थयह गुह्यसे भी गुह्यतर (शरणागतिरूप) ज्ञान मैंने तुझे कह दिया। अब तू इसपर अच्छी तरहसे विचार करके जैसा चाहता है, वैसा कर।
रोमन में पढ़ें
iti te jñānam ākhyātaṁ guhyād guhyataraṁ mayā
vimṛiśhyaitad aśheṣheṇa yathechchhasi tathā kuru
गीता 3.21श्रीकृष्ण
यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः।
स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते ॥
हिंदी अर्थश्रेष्ठ मनुष्य जो-जो आचरण करता है, दूसरे मनुष्य वैसा-वैसा ही आचरण करते हैं। वह जो कुछ प्रमाण देता है, दूसरे मनुष्य उसीके अनुसार आचरण करते हैं।
रोमन में पढ़ें
yad yad ācharati śhreṣhṭhas tat tad evetaro janaḥ
sa yat pramāṇaṁ kurute lokas tad anuvartate