गीता 9.9
कुंडलीपंचांग

भगवद्गीता · अध्याय 9 · श्लोक 9

गीता 9.9

अध्याय 9 – राजविद्याराजगुह्ययोग · श्रीकृष्ण कहते हैं

गीता 9.9 श्रीकृष्ण

न च मां तानि कर्माणि निबध्नन्ति धनञ्जय।
उदासीनवदासीनमसक्तं तेषु कर्मसु ॥

हिंदी अर्थहे धनञ्जय ! उन (सृष्टि-रचना आदि) कर्मोंमें अनासक्त और उदासीनकी तरह रहते हुए मेरेको वे कर्म नहीं बाँधते।

रोमन में पढ़ें

na cha māṁ tāni karmāṇi nibadhnanti dhanañjaya
udāsīna-vad āsīnam asaktaṁ teṣhu karmasu

हिंदी अर्थ स्वामी रामसुखदास जी के अनुवाद पर आधारित है। शीर्षक, सरल भावार्थ, मुख्य शब्द और "आज के जीवन में" SachiBhakti की ओर से।