गीता 9.14
कुंडलीपंचांग

भगवद्गीता · अध्याय 9 · श्लोक 14

गीता 9.14

अध्याय 9 – राजविद्याराजगुह्ययोग · श्रीकृष्ण कहते हैं

गीता 9.14 श्रीकृष्ण

सततं कीर्तयन्तो मां यतन्तश्च दृढव्रताः।
नमस्यन्तश्च मां भक्त्या नित्ययुक्ता उपासते ॥

हिंदी अर्थनित्य- (मेरेमें) युक्त मनुष्य दृढ़व्रती होकर लगनपूर्वक साधनमें लगे हुए और भक्तिपूर्वक कीर्तन करते हुए तथा नमस्कार करते हुये निरन्तर मेरी उपासना करते हैं।

रोमन में पढ़ें

satataṁ kīrtayanto māṁ yatantaśh cha dṛiḍha-vratāḥ
namasyantaśh cha māṁ bhaktyā nitya-yuktā upāsate

यह श्लोक इन विषयों में

हिंदी अर्थ स्वामी रामसुखदास जी के अनुवाद पर आधारित है। शीर्षक, सरल भावार्थ, मुख्य शब्द और "आज के जीवन में" SachiBhakti की ओर से।