गीता 11.11
कुंडलीपंचांग

भगवद्गीता · अध्याय 11 · श्लोक 11

गीता 11.11

अध्याय 11 – विश्वरूपदर्शनयोग · संजय कहते हैं

गीता 11.11 संजय

दिव्यमाल्याम्बरधरं दिव्यगन्धानुलेपनम्।
सर्वाश्चर्यमयं देवमनन्तं विश्वतोमुखम् ॥

हिंदी अर्थजिसके अनेक मुख और नेत्र हैं, अनेक तहरके अद्भुत दर्शन हैं, अनेक दिव्य आभूषण हैं, हाथोंमें उठाये हुए अनेक दिव्य आयुध हैं तथा जिनके गलेमें दिव्य मालाएँ हैं, जो दिव्य वस्त्र पहने हुए हैं, जिनके ललाट तथा शरीरपर दिव्य चन्दन, कुंकुम आदि लगा हुआ है, ऐसे सम्पूर्ण आश्चर्यमय, अनन्त रूपोंवाले तथा चारों तरफ मुखवाले देव-(अपने दिव्य स्वरूप-) को भगवान् ने दिखाया।

रोमन में पढ़ें

divya-mālyāmbara-dharaṁ divya-gandhānulepanam
sarvāśhcharya-mayaṁ devam anantaṁ viśhvato-mukham

हिंदी अर्थ स्वामी रामसुखदास जी के अनुवाद पर आधारित है। शीर्षक, सरल भावार्थ, मुख्य शब्द और "आज के जीवन में" SachiBhakti की ओर से।